जब भी होती है पहाड़ों की बात, चेहरे पर खुशी और दिल मे होती है की याद - विपिन दुर्गापाल - Himalayan Buzz
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जब भी होती है पहाड़ों की बात, चेहरे पर खुशी और दिल मे होती है की याद – विपिन दुर्गापाल

देवभूमि उत्तराखंड एक ऐसा राज्य है, जिसकी आधी आबादी दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर जैसे बड़े शहरों में रहती है। उत्तराखंड के निवासी देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहते हुए अपने अपने क्षेत्रों अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कहीं न कहीं अपने राज्य से बाहर रहने का दुख हमेशा उनके दिल में रहता है। प्रवासी उत्तराखंडियों के इसी दुःख  अपनी छोटी सी कविता में विपिन दुर्गापाल ने बखूबी दर्शाया है।

 

कोई दिल्ली, कोई मुंबई, कोई बैंगलोर में रहता है,
खुशी तब होती है दोस्तों जब कोई मेरे पहाड़ को देवभूमि कहता है!

खुश क्यू ना होऊ मेरा पहाड़ है ही कुछ  एेसा,
यहाँ आपको हर इंसान के दिल मे इंसानियत मिलेगी चाहे ना मिले जेब मे पैसा!

पहाड़ी लोग दिलवाले और मददगार होते है,
अगर कोई इनसे उलझे तो ये खूँखार होते है!

बिन दरवाजे बंद किए मेरे गाँव मे सब सोते है,
ना चोरी,ना डकैती सब बेखौफ होते है!

उत्तराखंड की है अलग सभ्यता गजब है यहाँ के संस्कार,
हरेला,फूलदेइ,घी-संगृात,घुघुती है यहाँ के त्योहार

नाक की नथ,माथे का शीशपूल,गले का गलोबंद,हाथों के पौजीं महिलाओं का सृंगार है
अल्मोडा, चमोली, बागेश्वर,रानीखेत अौर क्या खूब पिथौरागढ बाजार है!

मडुवे की रोटी,गढेरी की सब्ज़ी हर व्यंजन को पीछे करती है,
मेरी इजा, मेरी बैनी फिृज से ठंडा पानी नौहलै से भरती है!

जागर,छांछरी,झोडा,छोलिया है पहाडों की संस्कृति बेमिसाल,
क्यूकि दगडियो अगर रंगीला कुमाऊँ है तो छबीला गढवाल!

दोस्तों जहाँ भी जन्नत की होती है बात,
चेहरे पर खुशी, दिल मे होती है पहाडों की याद!

 

लेखक का परिचय:-

Vipin_Durgapalविपिन दुर्गापाल मूलतः रानीखेत के रहने वाले हैं और सीमान्त इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, पिथौरागढ़ में इंजीनियरिंग छात्र हैं। विपिन कवितायेँ लिखने का शौख रखते हैं और आपकी बहुत सी रचनाएं राज्यस्तरीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।

 

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