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देहरादून : आखिर क्यों छोड़ दिये जाते हैं कूड़े के ढेर ?

उत्तराखण्ड राज्य की राजधानी देहरादून अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है, सीवर लाइन की खुदाई के बाद सड़कों पे पड़े गड्ढे, हल्की सी भी बारिश के बाद जाम हो जाने वाली नालियां, सड़कों पर बिखरी निर्माण सामग्री और कचरे से पटे फ़ुटपाथ,देखा जाये तो पुरे शहर का यहीं हाल है|

लेकिन जब हम बात करते हैं शहर के मुख्य व्यावसायिक हब राजपुर रोड की तो कहीं न कहीं शहर के इस हिस्से की बाकी हिस्सों से बेहतर होने की उम्मीद जरूर करते हैं| राजपुर रोड पर ही जाने मने होटल्स, रेस्टुरेंट, ब्रांडेड शोरूम्स और माल्स स्थित हैं और दूसरे राज्योँ से आने वाले टूरिस्ट भी राजपुर रोड होकर ही मसूरी के लिये जाते हैं | इतने महत्वपूर्ण होने के बावजूद भी राजपुर रोड पर जहाँ तहाँ गन्दगी का अम्बार लगा हुआ है, पुरे रोड पे १ मीटर का दायरा भी ऐसा नहीं आता जहा कचरा ना पड़ा हो|

सफाई के नाम पे देहरादून नगर निगम और MDDA दोनों ही दर्जनों योजनाओं का क्रियान्वन कर रहें हैं लेकिन जमीनी स्तर पे हकीकत कुछ और ही बयां करती हैं जिसे तस्वीरों में साफ़ देखा जा सकता है| वास्तविकता तो यह ही कि सफाई कर्मचारी सही तरीके अपने जिम्मेदारियों का निर्वाह ही नहीं करते| महीने की पहली तारीख को तनख्वाह लेने से मतलब वाले सफाई कर्मचारिओं को कोई फर्क नहीं पड़ता शहर साफ़ रहे या ना रहे  और जिला प्रसाशन, MDDA व देहरादून नगर निगम कुम्भकरण की तरह गहरी निद्रा में हैं

सफाई कर्मचारी सड़क के किनारे बने फुटपाथों पर बस दिखावे के लिए झाडूं फेर देते हैं, झाड़ू लगाते वक्त वो कूड़े को उठाने की बजाय उसे ठिकाने लगाने की कोशिश में रहते हैं, कभी सड़क के किनारे बनी नालियों के कूड़ा दाल दिया जाता है तो कभी पेड़ों के जड़ों के पास इकठ्ठा कर दिया जाता है और जो कूड़ा ठिकाने नहीं लगाया जा सकता उसे फूटपाथ पर ही बड़े बड़े ढेर बना के छोर दो और ज्यादा किसी दिन काम किया तो उस कूड़े के ढेर में आग लगा दो|

सड़क के किनारे कचरे का ढेर लगा कर उसमे आग लगा देने से कैसे शहर की सफाई होगी ये तो वो सफाई कर्मचारी जानें या देहरादून नगर निगम| हकीकत ये है की ये कुढ़े के ढेर पूरी तरह कभी नहीं जलते और सालों से यही पड़े पड़े सड़ते रहते हैं और ये अधजले कूड़े के ढेर बिखरे हुए कचरे से भी कहीं ज्यादा बुरे लगते हैं|

देहरादून शहर जो अपने प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छता के लिए जाना जाता था आज वो गन्दगी के  ढेर के सामने घुटने टेक चूका है और इसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ आम नागरिक,  देहरादून नगर निगम और MDDA हैं|

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